मंदसौर | विशेष रिपोर्ट।
"बाप-दादा कमाते हैं औलाद के लिए, लेकिन जब दौलत का नशा सिर चढ़ बोलता है, तो खून के रिश्ते भी पानी पानी हो जाते हैं।मध्यप्रदेश के मंदसौर शहर में संपत्ति के मोह और रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी सनसनीखेज दास्तान सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मंदसौर में जिधर नज़र दौड़ाओ, उधर अपनी संपत्ति का झंडा गाड़ने वाले मशहूर और रसूखदार ज़मीन कारोबारी अनिल गुप्ता और उनके बेटे आशीष गुप्ता पर उनकी ही विधवा बेटी/बहन आरती गुप्ता ने बेदखली और प्रताड़ना के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अरबों रुपयों के ज़मीनी सौदे करने वाले इस गुप्ता परिवार का असली चेहरा तब बेनकाब हुआ, जब विधवा आरती गुप्ता को हक मांगने पर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ा। आरती का रो-रोकर बुरा हाल है—एक तरफ पति का साया उठ चुका है, तो दूसरी तरफ सगे पिता और भाई ने सहारा देने के बजाय संपत्ति के मोह में घर से बेदखल कर दिया है।
दर्द की दास्तान: "पति की मौत के बाद मिला तो सिर्फ धोखा:-बेबसी के आंसू बहाती आरती गुप्ता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वर्ष 2018 में उनके पति विनोद सिंघल की दुखद मृत्यु हो गई थी। दो बेटियों के भविष्य को संवारने और भरण-पोषण की उम्मीद में वह अपने मायके मंदसौर लौटी थीं।
आरती गुप्ता के शब्द:-"शुरुआत में तो पिता और भाई ने भरण-पोषण और पैतृक संपत्ति में हक देने का झांसा दिया। लेकिन जैसे ही करीब चार महीने पहले मैंने अपने और मेरी बेटियों के कानूनी हक की बात की, तो परिवार के सुर बदल गए। मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, धमकियां दी गईं और साफ कह दिया गया कि एक इंच ज़मीन भी नहीं मिलेगी। आरती ने बताया कि उनके भाई आशीष गुप्ता कई सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष बने फिरते हैं, लेकिन घर की विधवा बहन को उसका हक देने के नाम पर उनके दिल में जरा सी भी दया नहीं उपजी।
जब पिता-भाई के खिलाफ सड़क पर उतरीं बेटियां:- मामला तब और गरमा गया जब 'संयुक्त बेरोजगार नवयुवक एकता समिति' के बैनर तले मंदसौर के गांधी चौराहे पर बीते दिनों अनिल गुप्ता और आशीष गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस प्रदर्शन की सबसे चौकाने वाली बात यह रही कि खुद पीड़ित बेटी आरती गुप्ता अपनी बेटी पलक के साथ धरना स्थल पर बैठीं।
अरबों का साम्राज्य या धांधली का खेल? ज़मीनों के 'फर्जीवाड़े' पर भी घिरे अनिल गुप्ता:- मध्यप्रदेश के मंदसौर के गुप्ता परिवार पर सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जे और हेराफेरी के भी गंभीर आरोप लगे।
सर्वे नंबर 624 और 625 का मामला: नगर पालिका परिषद मंदसौर की (शासकीय) है, लेकिन फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर इसकी रजिस्ट्री और नामांतरण करा लिए गए। जांच में एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी की टीम ने प्राथमिक स्तर पर निर्माण को अवैध पाया था, जिसके बाद काम रुकवाया गया। अन्य विवादित ज़मीनें: विमानतल क्षेत्र, बस स्टैंड के पास (सर्वे नंबर 925-930, 934), दलौदा-बानीखेड़ी, नाहर सय्यद तालाब, अफीम गोदाम रोड और सेंट थॉमस स्कूल के पीछे की जमीनों के नक्शों में गड़बड़ी और अवैध निर्माण की शिकायतें दी गई हैं। वीडियो वॉर: बेटी का छलका दर्द, तो बैकफुट पर आए अनिल गुप्ता ने दी सफाई:-
पीड़ित बेटी आरती गुप्ता का रोते हुए वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मंदसौर की जनता में आक्रोश फैल गया। चौतरफा घिरते देख कारोबारी अनिल गुप्ता ने भी अपनी सफाई में एक वीडियो जारी किया है। हालांकि, जनता के बीच सवाल यही तैर रहा है कि "अगर नियत साफ है, तो विधवा बेटी सड़क पर न्याय के लिए क्यों भटक रही है? अब देखना यह होगा कि मंदसौर का प्रशासन एक बेबस विधवा बेटी को उसका हक और सुरक्षा दिला पाता है या फिर 'दौलत और रसूख' के आगे न्याय की गुहार दबा दी जाएगी!