ब मीनाक्षी नटराजन सांसद थीं तब तो भला किया नहीं, अब राज्यसभा जाकर क्या तीर मार लेंगी मैडम! तब 'नियम' का रोना... अब राज्यसभा का टोना! मीनाक्षी मैडम से जनता को कोई उम्मीद नहीं…!
05 Jun 2026
MP NEWS
मंदसौर-नीमच। मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की कद्दावर नेता सुश्री मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा सदस्य मनोनीत क्या किया गया, मानो इलाके के सियासी पारे में उबाल आ गया है। एक तरफ जहां उनके समर्थक जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद कांग्रेस के अंदरूनी खेमों और आम जनता के बीच से तीखे सवालों के तीर छूटने लगे हैं। जनता और कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस कदर फूटा है कि सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरियों तक सिर्फ एक ही चर्चा है— "जब लोकसभा सांसद थीं, तब तो भला किया नहीं, अब राज्यसभा जाकर क्या ही तीर मार लेंगी मैडम?
पढ़िए यह खास ग्राउंड रिपोर्ट!
कार्यकर्ता नाराज, जनता मायूस: "मैडम सिर्फ नियमों की दुहाई देती हैं!
खबर आते ही मंदसौर और नीमच के सियासी हलकों में सरेआम विरोध के सुर गूंजने लगे हैं। क्षेत्र के ही कुछ नाराज लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दर्द छलक कर सामने आया है।
एक स्थानीय नेता ने सीधे भड़ास निकालते हुए कहा:
मैडम के पास जब कोई कार्यकर्ता या नेता अपना जायज काम लेकर भी जाता था, तो उनका एक ही रटा-रटाया जवाब होता था— 'मैं नियम के खिलाफ नहीं जाऊंगी।' अरे मैडम! अगर हर काम किताबी नियमों से ही होना है, तो फिर जनता अपने जनप्रतिनिधि के पास उम्मीद लेकर क्यों जाए? जब वो खुद अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का काम नहीं करती थीं, तो आम जनता अब उनसे क्या ही उम्मीद रखे?
लोकसभा बनाम राज्यसभा: क्या बदलेगा समीकरण?
सवाल उठाने वालों का सीधा तर्क है कि जब मीनाक्षी नटराजन के पास मंदसौर-नीमच की जनता का सीधा जनादेश था (जब वह लोकसभा सांसद थीं), तब उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कोई ऐतिहासिक मील के पत्थर नहीं गाड़े। अब तो वह पिछले दरवाजे (राज्यसभा) से संसद पहुंच रही हैं, जहां जनता के प्रति उनकी सीधी जवाबदेही भी नहीं होगी।
विश्लेषण:-जनता को 'नियम' नहीं, 'समाधान' चाहिए होता है। अब देखना यह होगा कि राज्यसभा की कुर्सी पर बैठने के बाद क्या मीनाक्षी जी अपने इस पुराने ढर्रे को बदलती हैं, या फिर से वही पुराना राग अलापा जाएगा— "मैं नियम के खिलाफ नहीं जाऊंगी!"