मनासा। इस दोरान ग्राहकों की शिकायत पर सहकारिता विभाग के तीन सदस्यीय दल मनासा जांच करने पहुंचा। जांच करने मनासा पहुचे सहकारिता विभाग के अधिकारीयों से असंतुष्ठ होकर ग्राहक सड़क पर बैठ गए। करीब तीन घंटे तक चले हंगा के बाद सोसायटी के ग्राहक सोसायटी के बोर्ड आफ डायरेक्टर के साथ बैठक करने की जिद पर अड गए। इस दोरान विभाग द्वारा सोसायटी की जांच करने के साथ ही बोर्ड आफ डायरेक्टर के `साथ ग्राहकों की बैठक के लिए आगामी तारिक तय की गई। जिसके बाद सभी ग्राहकों ने अपना हंगामा समाप्त किया। उल्लेखनीय हो कि मनासा सहित जिले में कॉ-आपरेटिव सोसायटीयां मकड़ जाल की तरह फैलती जा रही हैं। जो भोली भाली जनता को अपने मकड़जाल में फंसाकर लोन के रूप में राशि बांटती हैं। जिसकी मासिक किस्त की राशि ग्राहक द्वारा समय पर नहीं भरे जाने पर चक्रवती ब्याज वसुलने के साथ उक्त ग्राहक व गारंटर के खाते सीज किए जा रहे हैं। इससे परेशान सोसायटी के ग्राहकों ने गुरुवार को सोसायटी के बाहर हंगामा कर दिया। गांव आंतरी माता के पंकज जैन ने बताया कि मैने वर्ष 2018 में ढेड़ लाख रूपए का लोन लिया था। इसमें से मेरे द्वारा 80 रूपए जेमा किए गए। घर की आर्थीक स्थिति खराब होने के कारण 8860 रूपए की पर माह के हिसाब से मैं 14 किस्त नहीं भर पाया। ऐसे में मेरे कुल 89076 रूपए बाकी थे। जिसका सोसायटी ने 4 लाख 80 हजार रूपए जमा करवाने का नोटिस थमाने के साथ ही गारंट के खाते सीज कर दिए। गांव अन्यामामा देव के महेश दास बैरागी ने बताया कि मैंने सोसायटी से एक लाख रूपए का लोन लिया था। जिसकी मेरे द्वारा 60 हजार रूपए की राशि जमा करवा दी थी। नोटिस मिलने पर खेत बेच कर ढेड लाख रूपए दोबारा 50 हजार रूपए जमा करवा दिए। एक लाख के तीन लाख जमा करवाने के बावजूद मेरे गारंटरो पर दबाव बनाया जा रहा हैं। ओर गारंटर मुझे परेशान कर रहे। जिसके चलते मुझे मेरा खेत बेचना पड़ा। वहीं मामले में पीड़ित ग्राहक बुधवार को अक्षय क्रेडिट का आपरेटिव सोसायटी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कलेक्टर व एसपी को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं। - फर्जी लोन चढ़ाया, पत्नि नेकी आत्महत्या रामपुरा के बृजेश कुमार सोनी ने बताया कि मेने अक्षय क्रेडिट का आपरेटिव सोसायटी में दो वर्ष तक काम किया। सोसायटी के बचत खाते में मेरे 70 हजार रूपए पढ़ें हुए थे। मेरे नाम से फर्जी तरिके से 1 लाख 41 हजार रूपए का लोन चढा दिया। फर्जी लोन के चलते मेरी पत्नि ने आत्महत्य कर ली। मेरे बच्चे अनाथ हो गए। बृजेश सोनी ने "बताया की जब मैं सोसायटी में काम करता था, तब सहकारिता विभाग के अधिकारी सोसायटी का आडिट करने आते थे। लेकिन अधिकारी राशि लेकर खाना पूर्ति कर चले जाते थे। सोसायटी की सही तरीके से जांच हो तो बहुत फर्जीवाड़ा निकलेगा। - एजेंट की गलती, सजा ग्राहक को मिली गांव मोड़ी के किसान नंदलाल ने बताया कि मैंने सोसायटी से 70 हजार का लोन लिया था। जिसका 64 हजार रूपए जमा करवा दिए। इस बीच पापा की तबियत खराब होने पर 4 हजार रूपए बकाया रह गए थे। 4 हजार रूपए के 19 हजार भी ऐजेंट को जमा करा दिए। वो राशि ऐजेंट ने सोसायटी में जमा नहीं करवाई, नतीजा सोसायटी ने मुजे 1 लाख 34 हजार का नोटिस थमाकर गारटंरों को परेशान कर उनके खाते सीज कर दिए। नगर के विकास बांगा ने 75 हजार का लोन लिया, 85 हजार जमा कर दिए। 16 हजार बकाया होने पर 1 लाख 30 हजार का नोटिस थमाया साथ ही हमारे चेक का दूरपयोग किया "गया। महेश कुमार वर्मा ने 40 हजार का लोन लिया, राशि जमा करवाई बावजुद 2 लाख 90 हजार रूपए की राशि की रिकवरी का नोटिस थमाया गया। जो चैक बाउंस होने पर तीन बारजेल जाकर आ गए। - डूब गई जनता की गाढ़ी कमाई इन सोसायटीयों के मकडजाल में फंसकर मनास के कुछ लोगों की गाढ़ी कमाई पहले ही डूब चुकी इसमें नगर की श्याम क्रेडिट कापरेटिव सोसायटी ग्राहकों के लाखों रूपए लेकर फरार हो गई। हाल ही मैं श्रीश्याम कापरेटिव सोसायटी व श्री पशुपतिनाथ सोसायटी जनता की गाड़ी कमाई लेकर भाग गई। ऐसे में जनता की लाखों रूपए र्क गाड़ी कमाई इन सोसायटी यों में डूब गई। जबकि सहकारिता विभाग के अधिकारीयों का कहना है कि यदि कोई सोसायटी डूबती है या भाग जाती है तो उसकी हमारी जिम्मेदारी नहीं है। हम सिर्फ सोसायटियों की जांच कर सकते हैं। - इनका कहना हंगामे के कारण हम जांच नहीं कर पाए हैं, - जांच के लिए हमने आगामी तारिक तय की है। यदि कोई सोसायटी डूबती है या भागती है तो उसके लिए सहकारिता विभाग जिम्मैदार नहीं रहेगा। उपभोक्ता उसकी शिकायत विभाग में कर सकते हैं उसकी जांच की जाएगी नरेंद्र कुमार नदीचा- सरकारी विभाग