जीरन। स्वच्छता अभियान में कभी वन स्टार रैंकिंग पाकर 25 लाख का ईनाम जितने वाली नगर परिषद जीरन में दो साल बाद ही स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ने लगी है। जिसके चलते जीरन नगर स्वच्छता की रैंकिंग में लगातार पिछड़ता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने स्वच्छता को लेकर जिस तरह से अभियान छेड़ा है उससे देश मे लगातार गन्दगी तो कम हो ही रही है बल्कि बीमारियों के ग्राफ में भी कमी आई है। लेकिन स्वच्छता अभियान के नाम पर सरकार द्वारा जिस तरह से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है उसका जमकर लाभ उठाने में जीरन नगर परिषद के सीएमओ नन्दलाल प्रजापति लगे हुए है। जीरन में स्वच्छता अभियान के नाम पर आए दिन फोटो सेशन हो रहा है।  सूत्रों की माने तो सफाई मित्रों को आवश्यक सुविधाओं को देने के नाम पर सामग्री तो खरीदी जा रही है लेकिन सिर्फ खरीदी सिर्फ कागजो में हो रही है जबकि हकीकत में सफाई मित्रों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध ही नही करवाये जा रहे है ।एक तरफ दो साल पहले ही जीरन नगर को ओडीएफ प्लस का प्रमाण पत्र जारी हो चुका है लेकिन सीएमओं नन्दलाल प्रजापति की लापरवाही के चलते आज भी महिला पुरूष खुले में शौच करने को मजबूर है। मिलीभगत से स्वच्छता अभियान के स्लोगन लिखने, रंगाई पुताई करने में बड़े बड़े बिल लगाकर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। नगर परिषद जीरन द्वारा किला परिसर और बीस भुजा माता मंदिर परिसर में सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूर्ण हुए साल भर हो गया है लेकिन न तो सीएमओं सामुदायिक शौचालय को चालू करने में कोई रुचि दिखा रहे है और न इसके रखरखाव पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। रहवासियों द्वारा लगातार मांग के बावजूद सामुदायिक शौचालय साल भर बाद भी उपयोग के लिए चालू नही किया जा रहा है। सीएमओं की हठधर्मिता के चलते किला परिसर के सामुदायिक शौचालय के समीप ही महिलाएं खुले में शौच करने को मजबूर है। ऐसे में लगता है कि जीरन सीएमओं चाहते ही नही है कि स्वच्छता अभियान में जीरन नम्बर वन बने। सीएमओं नन्दलाल प्रजापति सिर्फ स्वच्छता अभियान के नाम पर बिल बढ़ाने और उन बिलो को पास कर अपना उल्लू सीधा करने में लगें हुए है।