नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में प्रस्तावित 'आवादा ग्रुप' के मेगा सौर ऊर्जा प्लांट को लेकर जावद विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। जावद से कांग्रेस के कद्दावर नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश रांका ने इस परियोजना के पीछे चल रहे एक बड़े कथित भूमि घोटाले और गरीबों के आर्थिक शोषण का पर्दाफाश किया है।
श्री रांका ने सीधे तौर पर कंपनी के दलालों के आतंक, प्रशासनिक तंत्र की रहस्यमयी खामोशी और क्षेत्रीय विधायक व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा की 'चुप्पी' पर तीखे तीर छोड़े हैं।
डरा-धमकाकर अंगूठे लगवाने का खेल, प्रशासन क्यों है मौन?-अधिवक्ता प्रकाश रांका ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों से 'आवादा कंपनी' के प्रबंधक और उनके बिचौलिए सिंगोली के ग्रामीण इलाकों में पैर पसारे हुए हैं। क्षेत्र के सीधे-साधे, कम पढ़े-लिखे गरीब और भूमिहीन किसानों को डराया-धमकाया जा रहा है। उनकी बेशकीमती शासकीय पट्टों की जमीनों को मात्र 10 से 15 हजार रुपये की मामूली रकम देकर एग्रीमेंट (करार) के जाल में फंसाया जा रहा है। श्री रांका ने इस पूरे खेल के पीछे विधिक (कानूनी) पेंच को उजागर करते हुए कहा, "20 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत समाज के सबसे कमजोर तबके को दिए गए सरकारी पट्टे पूरी तरह से 'अहस्तांतरणीय' होते हैं। कानून की नजर में इन जमीनों का न तो हस्तांतरण हो सकता है और न ही कोई निजी लीज हो सकती है। फिर प्रशासन की नाक के नीचे ये एग्रीमेंट कैसे हो रहे हैं? यह पूरी तरह से विधिक धोखाधड़ी है और ये सारे दस्तावेज रद्दी के टुकड़े के समान शून्य हैं।"
'जावद अंधेरे में डूबा है, तो इस नए प्लांट का औचित्य क्या?'- विकास के बड़े-बड़े दावों को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस नेता रांका ने जनता के हक में एक बेहद तार्किक और बुनियादी सवाल दागा। उन्होंने पूछा कि सिंगोली के भगवानपुरा और बड़ी जैसे क्षेत्रों में पहले से ही करीब 1,000 मेगावाट बिजली का भारी-भरकम उत्पादन हो रहा है। इसके बावजूद जावद विधानसभा क्षेत्र का किसान, व्यापारी और आम नागरिक अघोषित बिजली कटौती और अंधेरे से जूझ रहा है। उन्होंने पूछा, "जब हमारे क्षेत्र की धरती से पैदा होने वाली बिजली का लाभ स्थानीय जनता को नहीं मिल रहा, स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, तो फिर किसानों की आजीविका और पशुओं के चरागाह छीनकर एक और नई निजी कंपनी को जमीन सौंपने का क्या औचित्य है? इस परियोजना से जावद की जनता को क्या लाभ मिलने वाला है?"
विधायक जी को खुली राजनैतिक और नैतिक चुनौती-क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सखलेचा को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए श्री रांका ने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को इस पूरे दमन चक्र और दलालों की सक्रियता की पल-पल की जानकारी होगी । इसके बावजूद वे सब कुछ जानकर भी अनजान बनने का बेहतरीन अभिनय कर रहे हैं। पूंजीपतियों और बड़ी कंपनियों के फायदे के लिए गरीबों के हितों की अनदेखी की जा रही है। श्री रांका ने विधायक से कहा "यदि वास्तव में स्वयं को किसानों और क्षेत्र की जनता का सच्चा रखवाला और जनप्रतिनिधि मानते हैं, तो वे तुरंत सामने आएं। अपनी सरकार और राजनैतिक रसूख का इस्तेमाल कर इन सभी अवैध एग्रीमेंटों की उच्च स्तरीय जांच करवाएं और इन्हें तत्काल प्रभाव से सरकारी तौर पर कैंसिल (निरस्त) करवाकर दिखाएं, वरना जनता उनका असली चेहरा पहचान चुकी है।"
गरीबों से अपील— 'कानून से ऊपर कोई नहीं, मैं मुफ़्त लड़ूँगा आपकी विधिक लड़ाई'
पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रकाश रांका ने सिंगोली और जावद क्षेत्र के सभी प्रभावित पट्टाधारकों, किसानों और स्थानीय नागरिकों से निर्भीक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा, "आप इस माटी के मूल निवासी हैं। आपकी जमीनों का फैसला किसी की दबंगई से नहीं, बल्कि देश के कानून और वैध दस्तावेजों से होगा।
अपने मूल पट्टे संभालकर रखिए और किसी के दबाव में मत आइए
एडवोकेट रांका ने स्पष्ट घोषणा की है कि वे इस लड़ाई में पूरी तरह गरीबों के साथ खड़े हैं। वे न केवल इस मुद्दे को प्रशासन के सामने पूरी ताकत से उठाएंगे, बल्कि प्रभावित गरीब परिवारों के हक के लिए अदालत में मुफ़्त कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।