नीमच। जिले में शनिवार,15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का मुख्य आयोजन उस समय चर्चा का विषय बन गया,जब प्रशासनिक व्यवस्थाओं से नाराज होकर पत्रकारों को कार्यक्रम का कवरेज अधूरा छोड़कर बाहर आना पड़ा। स्थानीय क्रमांक-2 स्कूल मैदान पर आयोजित मुख्य समारोह के दौरान मीडिया कर्मियों के बैठने और कवरेज के लिए कोई उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई। मैदान पर कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों का आरोप है कि वहां न तो बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था थी और न ही सुचारू रूप से समाचार संकलन के लिए कोई जगह तय की गई थी। इसके चलते लगातार बाधा उत्पन्न हो रही थी। जब इस व्यवस्था को लेकर पत्रकारों ने एसडीएम पराग जैन से चर्चा की, तो वहां से भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अनाधिकृत लोगों का प्रवेश और प्रोटोकॉल की अनदेखी बना विवाद का कारण
मौके पर मौजूद पत्रकारों ने बताया कि एक ओर जहां पेशेवर मीडिया कर्मियों को कवरेज में परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं मैदान पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग बिना रोक-टोक घूम रहे थे जिनका पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं था। इसके अलावा, जनप्रतिनिधियों के साथ आए अतिरिक्त कैमरापर्सन और अन्य लोग भी बिना किसी बाधा के घूमते नजर आए, जबकि मुख्य कवरेज करने वालों के लिए जगह तक नहीं थी। समारोह के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर कई अन्य सवाल भी उठे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन बेहद संक्षिप्त रहा। धूप और गर्मी के कारण मैदान में मौजूद छोटे बच्चों को परेशानी उठानी पड़ी, जबकि वीआईपी गैलरी और मंच के आसपास जलपान का दौर चलता रहा। पत्रकारों का कहना है कि एक तरफ मंच से अनुशासन और प्रोटोकॉल की बातें कही जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर ही नियमों की अनदेखी साफ दिखाई दे रही थी।
इस पूरे मामले को लेकर जिला युवा प्रेस क्लब, नीमच के अध्यक्ष राकेश मालवीय ने दो टूक शब्दों में कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान क्रमांक-2 स्कूल मैदान पर मीडिया के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके बावजूद पत्रकार लगातार कवरेज कर रहे थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें परेशान और अपमानित किया गया तथा कवरेज करने से रोका गया। इस असहयोगात्मक और उदासीन रवैये से आहत होकर मैदान में रहकर लगातार संघर्ष करने वाली मीडिया को मजबूरन कवरेज अधूरा छोड़ना पड़ा। राष्ट्रीय पर्व होने के कारण हमने आयोजन का पूर्ण बहिष्कार न करके केवल कवरेज अधूरा छोड़ना ही उचित समझा। हमें पूरी उम्मीद है कि भविष्य में प्रशासन इस तरह की लापरवाहियों से बचेगा और पत्रकारों के सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा।