नीमच। नीमच शहर के एकमात्र प्रमुख खेल मैदान को बचाने की मांग को लेकर पिछले लंबे समय से आंदोलनरत मैदान बचाओ समिति ने मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रशासनिक निर्णयों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। समिति ने आरोप लगाया कि सांदीपनि (CM RISE) स्कूल के निर्माण के लिए जिस खेल मैदान को प्रभावित करने की तैयारी की जा रही है, वहां पहले से ही शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 संचालित है,जो वर्तमान में केंद्र सरकार की PM SHRI योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालय है। समिति ने सवाल उठाया कि जब एक केंद्र-प्रायोजित PM SHRI स्कूल पहले से उसी परिसर में संचालित है, तो उसे हटाकर उसी स्थान पर सांदीपनि स्कूल बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?  क्या CM RISE योजना, PM SHRI से बड़ी या अधिक महत्वपूर्ण योजना है कि एक संचालित PM SHRI विद्यालय को ही विस्थापित करने की नौबत आ गई?
PM SHRI को हटाकर CM RISE—आखिर प्राथमिकता किसकी?
पत्रकार वार्ता में समिति ने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही उठाया कि एक ओर केंद्र सरकार की PM SHRI योजना के तहत विद्यालय में लाखों रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी परिसर को सांदीपनि स्कूल के लिए प्रस्तावित किया जा रहा है।
समिति के अनुसार परिसर में लगभग ₹25 लाख की लागत से हॉल का निर्माण हो चुका है तथा डोम का निर्माण अंतिम चरण में है। यदि परिसर को सांदीपनि स्कूल के लिए ध्वस्त अथवा पुनर्निर्माण के उद्देश्य से खाली कराया जाता है तो हाल में खर्च किया गया सरकारी धन और बनाई गई परिसंपत्तियां प्रभावित होंगी।
समिति का सीधा सवाल है—जनता के टैक्स के पैसे से बनाई गई परिसंपत्ति को कुछ समय बाद तोड़ने की नौबत क्यों लाई जा रही है? इस वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी?
जिस जगह PM SHRI जाएगा, वहां पहले से कन्या विद्यालय! फिर बेटियों का क्या?
समिति ने पत्रकार वार्ता में दूसरा बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि वर्तमान में जहां गर्ल्स स्कूल/कन्या विद्यालय के रूप में सांदीपनि विद्यालय संचालित है, वहां क्रमांक-2 के PM SHRI विद्यालय को ले जाने की बात सामने आ रही है।
यानी एक ओर PM SHRI स्कूल को उसके वर्तमान परिसर से हटाकर दूसरी जगह ले जाने की बात हो रही है और दूसरी ओर जिस स्थान पर उसे ले जाने की बात है, वहां पहले से कन्या उमावि/बालिकाओं का विद्यालय संचालित है।
समिति ने पूछा—
“यदि PM SHRI स्कूल वहां चला गया तो वर्तमान कन्या विद्यालय की छात्राओं का क्या होगा?”
“जो छात्राएं Co-Ed स्कूल में पढ़ना नहीं चाहतीं, उनके लिए प्रशासन की क्या व्यवस्था है?”
“क्या बालिकाओं और उनके अभिभावकों से उनकी राय ली गई है?”
“एक स्कूल बनाने के लिए दूसरे स्कूल और फिर तीसरे विद्यालय के अस्तित्व को प्रभावित करना आखिर किस तरह की शिक्षा नीति है?”
एक मैदान, तीन फैसले और सैकड़ों सवाल
समिति ने कहा कि पूरे मामले को केवल मैदान की जमीन के रूप में देखना गलत होगा। यहां मामला खेल मैदान, PM SHRI विद्यालय, कन्या विद्यालय और प्रस्तावित सांदीपनि स्कूल—चारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। समिति का कहना है कि यदि प्रशासन के पास सांदीपनि स्कूल के लिए अलग से पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है तो उसी दिशा में प्रयास होना चाहिए। शहर और आसपास की उपलब्ध सरकारी जमीनों का उपयोग कर आधुनिक सांदीपनि स्कूल बनाया जा सकता है। “आधुनिक स्कूल भी बने और नीमच का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान भी बचे—दोनों काम एक साथ क्यों नहीं हो सकते?” यह सवाल समिति ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से किया।
20 साल से मैदान बचाता आया है संघर्ष
मैदान बचाओ समिति ने बताया कि पिछले करीब 20 वर्षों से समिति के संघर्ष के कारण यह मैदान अपने वर्तमान स्वरूप में बचा हुआ है। मॉडल स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय सहित विभिन्न निर्माण योजनाओं के दौरान भी मैदान को प्रभावित करने के प्रयास हुए, लेकिन विरोध के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की गई। समिति के अनुसार जब छात्रावास एवं अन्य निर्माण मैदान के बीच किए जाने की स्थिति बनी थी,तब भी विरोध के बाद लेआउट में परिवर्तन कराया गया और निर्माण मैदान को छोड़कर एक तरफ किया गया। समिति का कहना है कि उस समय जनप्रतिनिधियों की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया था कि मैदान के वर्तमान स्वरूप के साथ अब कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
वैकल्पिक जमीन नहीं मिली तो मैदान ही क्यों? समिति ने आरोप लगाया कि सांदीपनि स्कूल के लिए समय रहते वैकल्पिक भूमि का चयन नहीं किए जाने का खामियाजा अब शहर के सबसे महत्वपूर्ण खेल मैदान को भुगतना पड़ रहा है। 

पत्रकार वार्ता में समिति ने सवाल किया—
“जब शहर में अन्य सरकारी जमीनें उपलब्ध हैं, तो खेल मैदान ही प्रशासन की पहली पसंद क्यों बना?”
“विवादित अथवा अन्य उपलब्ध सरकारी जमीनों के समाधान का प्रयास करने के बजाय मैदान पर ही निर्णय क्यों?”
निर्माण शुरू हुआ तो बीच में अटकने का खतरा समिति ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक प्रशासनिक, विभागीय, वित्तीय और विधिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह स्पष्ट किए बिना निर्माण शुरू कराया गया और बाद में मामला न्यायालय अथवा किसी जांच एजेंसी के समक्ष पहुंचा, तो निर्माण कार्य बीच में अटक सकता है। ऐसी स्थिति में निर्माण पर खर्च होने वाली राशि और उससे होने वाले नुकसान की जवाबदेही आखिर किसकी होगी? समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले के दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया की जांच की मांग करेगी।
समिति का सबसे बड़ा सवाल—क्या CM RISE, PM SHRI से बड़ी योजना है?
पत्रकार वार्ता में समिति ने कहा कि PM SHRI और CM RISE दोनों ही शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण योजनाएं हैं। ऐसे में सवाल किसी योजना को छोटा-बड़ा बताने का नहीं, बल्कि यह है कि एक योजना को लागू करने के लिए पहले से संचालित दूसरी योजना के विद्यालय को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? समिति ने कहा कि यदि दोनों योजनाओं के लिए अलग-अलग स्थान उपलब्ध कराए जा सकते हैं तो ऐसा किया जाना चाहिए।
“एक आधुनिक विद्यालय के लिए दूसरे आधुनिक विद्यालय को उजाड़ना कैसी योजना है?”
यही सवाल अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
मैदान बचाओ समिति की स्पष्ट मांगें
समिति ने मांग की कि—
PM SHRI विद्यालय क्रमांक-2 के वर्तमान स्वरूप और परिसर को सुरक्षित रखा जाए।
खेल मैदान के मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाए।
PM SHRI मद से निर्मित लगभग ₹25 लाख के हॉल और निर्माणाधीन डोम को तोड़ने का कोई निर्णय नहीं लिया जाए।
सांदीपनि स्कूल के लिए अलग और उपयुक्त वैकल्पिक सरकारी भूमि का चयन किया जाए। वर्तमान कन्या विद्यालय की छात्राओं के भविष्य और उनकी शिक्षा व्यवस्था पर स्पष्ट निर्णय सार्वजनिक किया जाए।
PM SHRI विद्यालय को स्थानांतरित करने से पहले संबंधित विभागों की स्वीकृतियों और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।
सांदीपनि विद्यालय का निर्माण जल्दबाजी में शुरू न किया जाए, जिससे भविष्य में किसी विवाद के कारण परियोजना अधर में न लटके।
खेल मैदान, PM SHRI स्कूल और कन्या विद्यालय—तीनों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाए। 

नहीं मानी मांग तो हाईकोर्ट तक जाएगी लड़ाई,मैदान बचाओ समिति ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल मैदान की जमीन बचाने तक सीमित नहीं है। समिति के अनुसार यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जनहित एवं नियमों की अनदेखी करते हुए निर्णय पर आगे बढ़ते हैं तो समिति कानूनी स्तर पर उच्च न्यायालय तक लड़ाई ले जाएगी तथा शहर में शांतिपूर्ण जनआंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में कपिल सिंह चौहान,श्याम गुर्जर, निर्मलदेव नरेला, कीर्ति पंचोली, गजेंद्र सिंह चौहान, राकेश शर्मा एवं मूर्तजा डेरकी सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे। 

सबसे बड़ा सवाल अब जनता के सामने
एक तरफ नीमच का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान, दूसरी तरफ PM SHRI का मौजूदा विद्यालय और तीसरी तरफ कन्या विद्यालय की छात्राएं—क्या एक सांदीपनि स्कूल के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाना जरूरी है?
सरकार आधुनिक स्कूल बनाए, लेकिन सवाल यह है—क्या विकास के लिए पहले से मौजूद स्कूल और खेल मैदान को हटाना ही एकमात्र रास्ता है?
नीमच अब इस सवाल का जवाब मांग रहा है।