नीमच। जावद विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई में शुक्रवार को गुरु-शिष्य के रिश्ते की ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। विद्यालय में 28 साल 3 महीने तक सेवाएं देने वाले शिक्षक बाबूलाल तुरंगरिया के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित विदाई समारोह उस समय भावनाओं से भर उठा, जब वे स्कूल से घर लौटने लगे। जैसे ही बाबूलाल तुरंगरिया स्कूल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, स्कूली बच्चों का सब्र टूट गया। छात्र-छात्राएं दौड़कर उनके पास पहुंचे और कोई उनका हाथ पकड़कर रोने लगा तो कोई उनके पैरों से लिपट गया। मासूम बच्चे रोते हुए कह रहे थे, ‘सर, हम आपको घर नहीं जाने देंगे…’ और ‘सर, हमें छोड़कर मत जाइए।’
आंसुओं से भीग गया स्कूल परिसर,विदाई के इन दृश्यों को देखकर साथी शिक्षक, अभिभावक और ग्रामीण भी भावुक हो उठे। माहौल इतना मार्मिक हो गया कि स्वयं बाबूलाल तुरंगरिया की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। उन्होंने बच्चों को गले लगाया, उनके सिर पर हाथ फेरा और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए समझाने का प्रयास किया।
एक ही स्कूल में नियुक्ति,वहीं से रिटायरमेंट
बाबूलाल तुरंगरिया ने 1 अप्रैल 1998 को प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई में अपनी पहली नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने पूरा सेवाकाल इसी विद्यालय में बिताया और 31 जुलाई 2026 को यहीं से सेवानिवृत्त हुए। आज के समय में जहां अधिकांश कर्मचारी बेहतर स्थान पर तबादले की कोशिश करते हैं, वहीं उन्होंने अपना पूरा जीवन गांव के बच्चों की शिक्षा को समर्पित कर दिया।
जरूरतमंद बच्चों के लिए खुद खरीदते थे किताबें
ग्रामीणों और शिक्षकों के अनुसार बाबूलाल तुरंगरिया केवल शिक्षक नहीं,बल्कि बच्चों के लिए अभिभावक और मार्गदर्शक भी थे। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो,इसके लिए वे कई बार अपने वेतन से कॉपी,किताबें, पेन और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदकर देते थे। गांव में किसी भी परिवार के सुख-दुख में वे हमेशा साथ खड़े नजर आते थे।