नीमच। शहर के ऐतिहासिक हायर सेकेंडरी स्कूल खेल मैदान को बचाने की मांग अब केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक विशाल जनआंदोलन का स्वरूप धारण कर लिया है। 'मैदान बचाओ समिति' के आह्वान पर आयोजित "ताली-थाली जन-जागरण अभियान" के तहत नीमच की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। थाली-चम्मच की तेज खनक, ढोल-ताशों की गूंज, इलेक्ट्रॉनिक माइक से बुलंद होते नारे और खिलाड़ियों के हुजूम ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान से सायंकाल प्रारंभ हुई यह ऐतिहासिक रैली सब्जी मंडी चौराहा, फव्वारा चौक और कमल चौक से होते हुए पुनः मैदान पहुंचकर संपन्न हुई। रैली के मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक की रफ्तार थम सी गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
व्यापारियों और शहरवासियों ने बजाईं तालियाँ,इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न खेल एवं व्यापारिक संस्थाएं तथा आम नागरिक भी सड़कों पर उतरे। जिस-जिस मार्ग से यह यात्रा गुजरी, वहाँ सड़क किनारे खड़े लोगों ने तालियाँ बजाकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया, वहीं कई व्यापारियों ने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया।
"मैदान नहीं रहेगा, तो हमारे सपनों की दौड़ थम जाएगी" गूंजी खिलाड़ियों की आवाज़
रैली के दौरान इलेक्ट्रॉनिक माइक से लगातार शहरवासियों से आने वाली पीढ़ियों के हित में एकजुट होने की अपील की गई। आंदोलन में शामिल विभिन्न वक्ताओं व खिलाड़ियों ने अपना दर्द और आक्रोश बयां किया और जिम्मेदारों पर मैदान चुराने का आरोप लगाया: कीर्ति पंचोली (सदस्य, मैदान बचाओ समिति): "यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि शहर के भविष्य को बचाने का अभियान है। इस मैदान में शहर की धड़कन बसती है... ये बच्चे जो यहाँ आए हैं ये कोई राजनीतीक दल के सदस्य नहीं है, इस मैदान में नीमच की कई पीढियां खेली है और कई खेलेंगी... कई ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। यदि यह मैदान खत्म हुआ तो युवाओं के अभ्यास का सबसे बड़ा केंद्र समाप्त हो जाएगा। यह पूरे शहर के सम्मान का सवाल है।" कुसुम भाटी (फिजिकल भर्ती अभ्यर्थी): "हम प्रतिदिन पुलिस और अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए इसी मैदान पर दौड़ और शारीरिक अभ्यास करते हैं। यदि यह मैदान छीन लिया गया, तो हमारे पास तैयारी के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं बचेगा।" उर्वशी (फिजिकल भर्ती अभ्यर्थी): "यह मैदान हमारे लिए केवल खेलने की जगह नहीं, बल्कि रोज़गार और भविष्य की उम्मीद है। सुबह-शाम सैकड़ों युवा सेना और पुलिस में जाने का सपना लेकर यहाँ पसीना बहाते हैं। मैदान खत्म होने से उन युवाओं के सपने टूट जाएंगे।"
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को अल्टीमेटम
रैली में शामिल सेकड़ों बच्चों, खिलाड़ियों, छात्राओं, कोचों और नागरिकों ने एक स्वर में नारा बुलंद किया "मैदान बचेगा, तभी नीमच बचेगा... खेल बचेगा, तभी भविष्य बचेगा!"
'मैदान बचाओ समिति' ने जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए साफ़ किया कि यह केवल जन-जागरण अभियान का एक चरण था। यदि खिलाड़ियों की भावनाओं और जनहित को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो इस लड़ाई को अंतिम परिणाम तक और भी अधिक व्यापक तथा उग्र रूप में (शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से) लड़ा जाएगा।
अब फैसले पर टिकीं शहर की निगाहें,बुधवार की इस विशाल जन-जागरण रैली ने यह साबित कर दिया है कि खेल मैदान का मुद्दा अब नीमच की सार्वजनिक बहस और जन-सरोकार का मुख्य केंद्र बन चुका है। खिलाड़ियों और नागरिकों की इस अभूतपूर्व एकजुटता के बाद अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन-प्रशासन इस सामूहिक मांग पर क्या रुख अपनाता है। इस अवसर पर 'हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान बचाओ समिति' के सदस्यों सहित कपिल सिंह चौहान, श्याम गुर्जर, कीर्ति शर्मा, विमल शर्मा,अफ़रोज़ भाई,मोहित रामरख्याणी, मुर्तुज़ा डेरकी,सूरज शर्मा,मनीष वर्मा,शुभम मेहरा,तरुण मलानी,वसीम भाई, मोहित बदलानी और रमेश सहित सेकड़ो संख्या में मैदान की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए इस मुहिम में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे नागरिक शामिल रहे।