नीमच। शहर के ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। शनिवार सुबह भारत माता चौराहे पर उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब खिलाड़ियों, युवाओं और नागरिकों ने सड़क पर ही क्रिकेट और फुटबॉल खेलकर विरोध दर्ज कराया। ‘मैदान बचाओ समिति’ के बैनर तले आयोजित यह प्रदर्शन शहर के प्रमुख खेल मैदान पर प्रस्तावित संदीपनी हायर सेकेंडरी स्कूल निर्माण के विरोध में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर खेलते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि मैदान समाप्त हो गए,तो आने वाली पीढ़ियों के बच्चों के पास खेलने के लिए केवल सड़कें ही बचेंगी। चौराहे से गुजरने वाले लोग इस अनोखे आंदोलन को देखकर रुक गए और कई लोगों ने खिलाड़ियों की मांग का समर्थन भी किया।
शिक्षा से विरोध नहीं,मैदान बचाने की मांग
समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शिक्षा या स्कूल निर्माण के विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि शहर में स्कूल के लिए अन्य उपयुक्त स्थान उपलब्ध हैं और खेल मैदान को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि शिक्षा और खेल दोनों समाज के समग्र विकास के लिए समान रूप से आवश्यक हैं, इसलिए किसी एक के लिए दूसरे का बलिदान उचित नहीं होगा।
सड़क पर खेलकर दिखाई भविष्य की तस्वीर
प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने क्रिकेट खेलते हुए बल्ला घुमाया और फुटबॉल को सड़क पर दौड़ाया। समिति का कहना था कि यह केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं,बल्कि भविष्य की संभावित स्थिति का संकेत है। यदि मैदान पर कंक्रीट की इमारत खड़ी हो गई, तो हजारों बच्चों और खिलाड़ियों के पास अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा।
खिलाड़ियों ने रखी अपनी बात
समिति के प्रमुख सदस्य मुर्तजा डेरकी ने कहा कि यह मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं,बल्कि नीमच के खेल इतिहास की पहचान है। यहां से अनेक खिलाड़ियों ने अपने खेल जीवन की शुरुआत की है। मैदान समाप्त होने का अर्थ शहर के खेल भविष्य को कमजोर करना होगा। एक अन्य सदस्य बाबा ने कहा कि सड़क पर खेलना कोई प्रदर्शन मात्र नहीं,बल्कि यह चेतावनी है कि यदि बच्चों से मैदान छीन लिए गए तो वे या तो मोबाइल की दुनिया में सीमित हो जाएंगे या फिर मजबूरी में सड़कों पर खेलेंगे, जो बेहद खतरनाक स्थिति होगी। कीर्ति पंचोली ने कहा कि समिति की मांग केवल इतनी है कि स्कूल के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय किया जाए। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बच्चों के स्वास्थ्य, खेल और भविष्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की।