नवीन कृषि मंडी गोदाम निलामी में फिर हुई सांठगांठ, समीरदास और सचिव उमेश बसेड़िया की कार्यप्रणाली पर लग रहे सवालिया निशान
28 Apr 2025
Local News
नीमच। चंगेरा स्थित नवीन कृषि उपज मंडी में सोमवार को पुन: गोदाम निलामी की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह 11 बजे से दोपहर 02 बजे तक निलामी में पारदर्शिता रही, लेकिन लंच के बाद दोपहर 03 बजे से व्यापारियो के साथ सांठगांठ कर भूखंडो की बंदरबांट की गर्ई। मामले में समीरदास और मंडी सचिव उमेश बसेडिया की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे है। ज्ञात हो कि बिते माह नवीन कृषि मंडी में तीन दिवसीय गोदाम निलामी की प्रकिया शुरू की गई थी, जिसमें दिनांक 26 और 27 मार्च को निलामी में पारदर्शीता बरती गई, लेकिन तीसरे दिन 28 तारीख को सोशल मीडिया के माध्यम से लहसुन, प्याज और मुंगफली के व्यापारियो से सांठगांठ होने का भांडाफोड़ हो गया। मामले में कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा ने तत्काल एक्शन लेते हुए 28 मार्च की निलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी। जिसके बाद मंडी कमेटी ने पुन: 28 अप्रैल को एक दिवसीय भूखंड निलामी की प्रकिया शुरू की। जिसमें दोपहर 02 बजे तक लहसुन व्यापारियो को भूखंड निलाम किए गए, निलामी करीब 27 लाख से शुरूआत होकर 37 लाख रूपये तक पहुंची। लंच के बाद दोपहर 03 बजे से पुन: निलामी प्रकिया शुरू हुई जिसमें मुंगफली और प्याज व्यापारियो को 18 से 19 लाख रूपये में सांठगांठ कर गोदाम आवंटित कर दिए गए। सूत्रो के हवाले से यह भी खबर सामने आ रही है कि नवीन मंडी गोदाम निलामी में सांठगांठ को लेकर मुंगफली व्यापारी जयसिंह विनय कुमार के कार्यालय पर योजना बनाई गई, जिसमें मंडी सचिव उमेश बसेड़िया और समीरदार भी शामिल हुए। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है जिन व्यापारियो के साथ धौखाधड़ी हुई है क्या उन्हे न्याय मिलेगा। फिर से एक बार मंडी निलामी को प्रतिबंधित कर पुन: पारदर्शीता के साथ निलामी प्रक्रिया की जायेगी। क्या मामले में कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा इस बार भी पहले की तरह कोई ठोस कदम उठायेंगे।
रिश्वतखोरी के बाद भी प्रशासन ने नही दिया ध्यान
नीमच कृृषि उपज मंडी ऐशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडी कहलाई जाती है, यहां किराना से लेकर अन्य उपजो की बड़ी मात्रा में निलामी होती है। हांल ही में बघाना स्थित कृषि उपज मंडी को चंगेरा स्थित नवीन मंडी में शिफ्ट करना था। लेकिन मंडी अधिकारियो ने यहां बड़ा घालमेल किया। पहले किराना व्यापारियो को इस संशय में रखा गया कि बघाना मंडी चंगेरा स्थित नवीन मंडी में विस्थापित नही होगी। जबकि ऐसा कोई लिखित आदेश या सूचना किसी व्यापारी को नही दी गई। मंडी सचिव उमेश बसेडिया और मंडी के समीरदास ने अवैध कमाई के लिए पुरा गैम प्लान सुनियोजित कर लिया था और इस आधार पर वर्ष 2024 में लहसुन व अन्य व्यापारियो से सांठगांठ कर समाचार पत्रो में विज्ञप्ति जारी नही की गई और न ही कोई भूखंड निलामी प्रक्रिया की गई। सीधे — सीधे कुछ व्यापारियो से मंडी कमेटी के अधिकारियो ने तालमेल बिठाकर उन्हे 4 से 5 लाख में करीब 300 से अधिक भूखंड चोरी — छूपे आवंटित कर दिए गए। जिसका आज तक न कोई रिकार्ड सार्वजनिक नही किया ओर न ही वर्तमान में कोई जानकारी उजागर की गई। लेकिन इस अंधी कमाई से भी जी नही भरा तो मंडी कमेटी के अधिकारियो ने नया रास्ता खौज लिया, जिसमें किराना व्यापारियो को निशाना बनाकर भूखंड निलामी की सुनियोजित योजना बनाई गई। वर्ष 2025 के मार्च माह की 26, 27 और 28 तारिख को तीन दिवसीय नवीन मंडी में भूखंड निलामी का ऐलान महज इसलिए किया, ताकि राजस्व की कुछ भरपाई करके मंडी कमेटी अपने भ्रष्टाचार से पल्ला झाड़ ले, और हुआ कुछ यू ही कि मंडी कमेटी के सरगनाओ ने मार्च माह मे होने वाली तीन दिवसीय भूखंड निलामी मेंं अपना मोटा हिस्सा निकालने के लिए निलामी प्रक्रिया को सुनियोजित कर लिया, जिसमें दो दिवस तक निलामी में पारदर्शीता अपनाई गई तो वही तीसरे दिन बड़ा खेल खेला गया, कुछ व्यापारियो से सांठगांठ कर अन्य व्यापारियो को निलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए इंकार कर दिया गया। इस दौगली प्रकिया से गुस्साए व्यापारियो ने कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियो को लिखित शिकायते भी की, जिसको लेकर 28 मार्च को होने वाली भूखंड निलामी पर आनन फानन में रोक लगानी पड़ी, जिसमें मंडी कमेटी ने अपनी सफाई देते हुए बताया कि तीसरे दिन यानि 28 मार्च की निलामी में हमे कम आवेदन प्राप्त हुए और राजस्व को हानि होती इसलिए निलामी प्रक्रिया को निरस्त किया गया है।
लेकिन इस मामले में कलेक्टर कार्यालय गुहांर लगाने पहुचे व्यापारियो के आवेदनो से सारी सच्चाई पानी की तहर छनकर सामने आ गई है। मंडी सचिव उमेश बसेडिया और मंडी के समीरदास ने भ्रष्टाचार के खेल को जन्म दिया था। व्यापारियो से सांठगांठ कर भूखंड आवंटन करने का भांडाफोड होते ही उमेश बसेडिया और समीरदास का अब तक कोई स्टेटमेंट बाहर नही आया था, न ही मीडिया द्वारा लगाये गए आरोपो का समीरदास और उमेश बसेडिया ने कोई स्पष्टिकरण किया है। जिससे पूर्व में ही अंदेशा हो गया था कि नवीन मंडी में भूखंडो को लेकर जमकर सांठगांठ हो रही है।
वही वर्तमान की बात की जाए तो सोमवार 28 अप्रैल को नवीन मंडी में भूखंडो की निलामी में पारदर्शीता के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। दोपहर 2 बजे तक जो निलामी प्रकिया पारदर्शीता के साथ समपन्न हो रही थी उसका रूख दोपहर 03 बजे से बदल दिया गया। दोपहर 03 बजे बाद निलामी में जमकर भ्रष्टाचार हुआ, जो भूखंड निलामी 26 लाख से शुरू होकर 37 लाख तक पहुंची थी। दोपहर 03 बजे बाद अचानक उसका स्तर गिर गया। महज 18 से 19 लाख में बंदरबाट कर समीरदास और मंडी सचिव उमेश बसेडिया ने इतिश्री कर ली। ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या जिला प्रशासन इतने बडे घोटाले की निष्पक्षता के साथ जांच करता है या पूर्व की तरह नवीन मंडी में भूखंड निलामी की अग्रिम तारीख जारी करता है।