प्रीतेश सारडा
नीमच। केंट थाना पुलिस ने बीते दिनों दो अलग-अलग स्थानों पर अवैध अफीम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इन कार्रवाइयों में पुलिस को एक तरफ जहां सफलता मिली तो वहीं दूसरी तरफ एक आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
पहली घटना में केंट पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक मोटरसाइकिल सवार से 2 किलो 800 ग्राम अवैध अफीम जब्त की। केंट पुलिस के अनुसार पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद फरार आरोपी की पहचान राजू उर्फ रायसिंग, निवासी आमद के रूप में की है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद, केंट पुलिस अभी तक इस फरार आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है। इतनी बड़ी मात्रा में अफीम बरामद होने के बाद भी मुख्य आरोपी का पकड़ में न आना पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर पुलिस इतने दिनों में भी एक पहचाने हुए आरोपी को क्यों नहीं पकड़ पाई है।
वहीं, दूसरी कार्रवाई में केंट पुलिस को सफलता मिली। यह कार्रवाई भरभड़िया फंटे पर की गई। यहां पुलिस ने एक कार को रोककर तलाशी ली, जिसमें से 1 किलो अवैध अफीम बरामद हुई। इस कार्रवाई में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बंटी पिता कन्हैया लाल नायक, निवासी गुजरखेड़ी सांखला के रूप में हुई है, जिसे धारा 8/18 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही, एक अन्य आरोपी प्रदीप पिता कन्हैयालाल सालवी, निवासी चंपी को भी धारा 8/29 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल अफीम जब्त की बल्कि आरोपियों को भी पकड़ने में सफलता हासिल की, जिसकी सराहना की जा रही है।
कुल मिलाकर, केंट पुलिस की इन दो कार्रवाइयों में एक विरोधाभासी तस्वीर सामने आती है। एक तरफ जहां पुलिस ने भरभड़िया फंटे पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अफीम और आरोपियों को पकड़ा, वहीं दूसरी तरफ पहली कार्रवाई में भारी मात्रा में अफीम जब्त करने के बावजूद मुख्य आरोपी का फरार हो जाना और अब तक न पकड़ा जाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंट पुलिस राजू उर्फ रायसिंग को कब तक गिरफ्तार कर पाती है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है। पहली कार्रवाई में असफलता कहीं न कहीं दूसरी कार्रवाई की सफलता पर भी सवालिया निशान लगाती है।