नीमच।  इंदौर से नीमच लौट रही सरकार उपकार की बस मल्हारगढ़ के पास महू-नीमच फोरलेन हाईवे पर मंगलवार को बस बेकाबू होकर पलट गई। इस हादसे में बस में सवार 21 यात्री घायल हो गए जिनका उपचार जिला चिकित्सालय में चल रहा हैं।  बताया गया है की कोई गंभीर घायल नहीं है। वही इस हादसे के बाद भी नीमच में परिहवन विभाग मूकदर्शक  बना हुआ हैं। नीमच से बड़े रूट की ओर चलने वाली बसों की छतों पर माल लादा जा रहा हैं।  लंबे रूट की  बसों में अवैधानिक रूप से (बिना टैक्स चुकाए) कृषि जिंसों का परिवहन किया जाता है। चौकाने वाली बात यह है कि इस रूट पर चलने वाली अधिकांश बसें ट्रक के रूप में उपयोग लाई जा रही है। जिम्मेदारों को जानकारी है, फिर कुंभकर्णीय नींद में हैं। आरटीओ और सेल्स टैक्स को है हादसे का इंतजार ! वर्षों पहले सेंधवा में बस हादसा हुआ था। दो बस संचालकों के विवाद की वजह से बेगुनाह लोगों को अपनी जान गवाना पड़ी थी। इस घटना के प्रदेश शासन कुंभकर्णीय नींद से जागा था। पिछले दिनों इंदौर में बस हादसे में 4 मासूमों ने अपने प्राण गंवाए। तक एक बार फिर नींद से शासन जागा । हादसे दर हादसे होने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती है। शायद यही कारण है कि नीमच से दिल्ली तक निजी बसों के माध्यम से अवैधानिक रूप से हो रहे कृषि जिंसों के परिवहन को लेकर भी प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार है।   पूर्व में  कृषि उपज मंडी अध्यक्ष निरंजन राजू तिवारी ने निजी बसों से हो रहे अवैधानिक परिवहन पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की थी। नतीजे भी सार्थक आए थे। वाणिज्यकर विभाग ने भी बसों से अवैधानिक रूप से हो रहे माल के परिवहन पर सख्ती दिखाई थी। बड़ी संख्या में चालानी कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कुछ समय में सब ठीक रहा । फिर लोडिंग अनलोडिंग के स्थान बदल दिए गए, लेकिन अवैध परिवहन बंद नहीं हुआ। एक बार फिर जिला मुख्यालय से ही बसों के माध्यम से अवैधानिक रूप से माल परिवहन किया जा रहा है और जिम्मेदार चुप्पी साधे हादसा होने का इंतजार कर रहे हैं। एक बार फिर जिला मुख्यालय से ही बसों के माध्यम से अवैधानिक रूप से माल परिवहन किया जा रहा है और जिम्मेदार चुप्पी साधे हादसा होने का इंतजार कर रहे हैं। नीमच से अन्य राज्यों में भेजा जाने वाला माल निजी बसों में ट्रक की तरह लोड किया जाता है। न कृषि उपज मंडी की कोई रसीद होती है और न ही मालक का आता पाता। केवल निर्धारित शुल्क अदा कर बस पर कृषि उपज या अन्य सामान लोड कर दिया जाता है। चौकाने वाली बात तो यह है कि बस की सीटों के बीच में भी कृषि जिंसों की बोरियां रख दी जाती हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिन बसों के माध्यम से इस तरह अवैधानिक रूप से जिंसों का परिवहन किया जाता है उनका परिवहन पुलिस अधीक्षक और कलेक्टोरेट के सामने ये बेरोकटोक होता है। जिम्मेदार अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी है, लेकिन वैधानिक कार्रवाई की बजाय मौन सादे बैठ रहते हैं।