निम्बाहेड़ा, 16 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 में नगर परिषद द्वारा बनाई गई विभिन्न मेला कमेटियों में नियुक्त कांग्रेस पार्षदों ने मेला प्रबंधन में पारदर्शिता ना होने और व्याप्त अनियमितताओं का विरोध करते हुए कमेटियों से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया है। इस संबंध में आयुक्त, नगर परिषद निम्बाहेड़ा को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर अपना इस्तीफा सौंपा गया। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि मेले के आयोजन में सभापति और उपसभापति सहित भाजपा के राजनीतिक आकाओं के संरक्षण में बड़े पैमाने पर वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

पार्षदों द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु एवं आरोप* सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजट में अपारदर्शिता :- पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुभाषचंद्र शारदा ने कहा कि मेले के 5 दिन बीत जाने के बावजूद मीरा रंगमंच पर आयोजित होने वाले 10 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का बजट न तो बोर्ड बैठक में पारित कराया गया और न ही आज तक इसकी राशि पार्षदों,मीडिया या आम जनता के सामने सार्वजनिक की गई है जो अपारदर्शित को स्पष्ट इंगित करता है। यहां तक कि फोटोग्राफी वीडियोग्राफी की टेंडर राशि इतनी अधिक बढ़ा दी गई है जो भ्रष्टाचार की संभावना को ओर प्रबल कर देता है।

टेंडरों की राशि में अनुचित वृद्धि :-पार्षद रविप्रकाश सोनी ने कहा कि प्रचार-प्रसार हेतु सामग्री छपाने और गिट्टी बिछाने,अर्थ मूवर्स मशीन किराए पर लेने जैसे कई अन्य कार्यों के टेंडरों की राशि बिना किसी आवश्यकता के अत्यधिक बढ़ा दी गई है जो अनुचित है।

पार्षदों की उपेक्षा की, पद का सम्मान भी किया:-पार्षद गीता वैष्णव एवं मुन्नीदेवी तेली ने कहा कि कमेटियों की बैठकों की सूचना कांग्रेस पार्षदों को केवल 15 से 30 मिनट पहले दी जाती थी ताकि वे बैठकों में शामिल होकर अपना लिखित विरोध दर्ज न करा सकें,जो कि पार्षद पद के सम्मान के खिलाफ है।

दुकान आवंटन में भ्रष्टाचार व चहेतों को लाभ :-पार्षद छगनलाल रेगर एवं जकी अहमद ने कहां की राजस्व एवं आवंटन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्षदों ने कहा कि राजनीतिक द्वेषता के कारण कई लोगों को दुकानें आवंटित नहीं की गईं। वर्षों से व्यापार कर रहे लोगों को प्रक्रिया से बाहर रखकर सत्ता पक्ष के चहेतों को दुकानें दी गईं, जिन्हें बाद में 35,000 रुपये से 48,000 रुपये तक में बेचा गया जो जनता से खुली लूट को स्पष्ट करता है। कांग्रेस पार्षदों राहत बी, अहमद नूर, सलमा बेगम, निर्मला मेघवाल, विपुल कुमावत, हीना अली, चांदी बाई पहाड़िया, मोहम्मद कुरैशी, दिलीप भांभी, मामूर मेव, लालीबाई मीणा ने स्पष्ट कहां कि जनता के साथ हो रही इस खुली लूट और सामूहिक भ्रष्टाचार में वे अपनी सहभागिता नहीं रखना चाहते, इसलिए वे मेला कमेटियों से त्यागपत्र दे रहे हैं। आने वाले समय में अन्य खुलासे भी जनता के समक्ष रखे जाएंगे।