मंदसौर। स्कॉर्पियो-एन के गुप्त चैंबर से 1 करोड़ 29 लाख रुपए की नकदी बरामद होने के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। मामले में सरपंच प्रतिनिधि भवान सिंह शंकरा सहित उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपी पिछले करीब सात महीनों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। अब आयकर विभाग ने भी मामले में जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मंदसौर जिले के शामगढ़ थाना क्षेत्र के बरखेड़ा उदा गांव में स्कॉर्पियो-एन से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। वाहन के विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चैंबर में रकम छिपाकर रखी गई थी। शुरुआती जांच में नकदी के स्रोत और उसके परिवहन के उद्देश्य को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
यूपी के दो आरोपियों से संपर्क की जांच
पुलिस जांच में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के प्रतापपुर निवासी मोहम्मद इस्लाम (47) और सेंट्रल स्टेट कॉलोनी निवासी सूर्यप्रकाश (59) के नाम सामने आए हैं। दोनों को मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के आपसी संपर्क, कॉल डिटेल और नकदी के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि बरामद रकम का संबंध मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त से हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
आयकर विभाग ने खंगालने शुरू किए दस्तावेज
मामले में बरामद 1.29 करोड़ रुपए की रकम को लेकर आयकर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की ओर से आरोपियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खातों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है, ताकि नकदी के वास्तविक स्रोत का पता लगाया जा सके।
जांच में यदि रकम का संबंध मादक पदार्थों की तस्करी से प्रमाणित होता है, तो आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई की संभावना जताई गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले के आर्थिक और आपराधिक पहलुओं की अलग-अलग पड़ताल कर रही हैं।
तस्करी के नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और आरोपियों के बीच इसकी भूमिका क्या थी। व्हाट्सएप कॉल के जरिए सात महीने से संपर्क में रहने की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियां संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।
फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि गुप्त चैंबर में छिपाकर रखे गए 1.29 करोड़ रुपए का वास्तविक स्रोत क्या है और इस रकम के पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।