*किरणों की किरण*
*सुरेश बोहरा*
निम्बाहेड़ा/ नगर में कृषि भूमि पर पर चल रहे मैरेज गार्डन और वाटिकाएं बिना किसी वैध अनुमति और सुरक्षा मापदण्डों को अपनाएं ही संचालित किए जा रहे है जिससे नगरपालिका एवं राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ ही नागरिकों की सुरक्षा से भी खिलवाड किया जा रहा है। 
राजस्थान में नियमानुसार मैरिज गार्डन को वाणिज्यिक उपयोग में माना गया है और भूमि उपयोग परिवर्तन,भवन मानचित्र स्वीकृति,फायर NOC तथा ट्रेड लाइसेंस जैसी प्रक्रियाएं संबंधित सेवाओं में शामिल हैं। लेकिन नगर में संचालित कई वैवाहिक स्थल बिना भू-रूपान्तरण करवाये ही व्यवसायिक उपयोग रुप से चल रहे हैं। 
एक तरफ तो इन वैवाहिक स्थलों के संचालक जनता  से तो भारी भरकम राशि वसूली करते है लेकिन सरकारी राजस्व नहीं चुकाते है। कुछ मरेज गार्डन के संचालको ने  कृषि भूमि पर कृषि उपयोग के नाम पर  विद्युत कनेक्शन लेकर व्यवसायिक उपयोग कर विद्युत विभाग को भी लंबे समय से  नुकसान पहुंचा रहे है जबकि यह यहां समारोह आयोजकों से उंचे दाम वसूलते हैं। वहीं सरकारी राजस्व खुद हडप जाते हैं।
नगरपालिका स्थानीय प्रशासन और अन्य जिम्मेदार सरकारी विभागों द्वारा विवाह स्थलों में फायर एनओसी,सुरक्षा नियमों, साफ-सफाई,पार्किंग गव्यवस्था व अन्य नियमों की पालना की और भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है । बिना किसी वैध स्वीकृति एवं सुरक्षा मापदंडों को अपनाए जाने के बावजूद नगर में नागरिकों के जानमाल से खिलवाड़ कर चलने वाले मैरिज गार्डनों के प्रति कोई कार्रवाई नहीं किया जाना स्थानीय एवं जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है, वहीं नगरपरिषद भी सरकारी राजस्व के नुकसान के प्रति गंभीर नहीं है।