दुकान पर आने वाले ग्राहक पहले “हरि ॐ” बोलकर अभिवादन करते हैं और फिर मिठाई का आनंद लेते हैं. यही परंपरा इस दुकान को बाकी मिठाई की दुकानों से अलग बनाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बचपन से वे इस परंपरा को देखते आ रहे हैं और आज भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया है. स्थानीय निवासी कैलाश सोनी बताते हैं कि यह दुकान कई पीढ़ियों से लोगों की पसंद बनी हुई है. उन्होंने कहा कि बचपन से यहां आ रहा हूं. जब हम छोटे थे, तब इनके पिताजी दुकान संभालते थे. उस समय भी ‘हरि ॐ’ बोलने पर हमें मिठाई मिलती थी. मैं करीब 58 साल से यह परंपरा देख रहा हूं. आज भी कई बच्चे और बड़े यहां आते हैं, ‘हरि ॐ’ बोलते हैं और मिठाई खाते हैं.
पर्यटक भी अनोखी परंपरा और खास मिठाई के हैं मुरीद
सिर्फ उदयपुर के लोग ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस अनोखी परंपरा और खास मिठाई का स्वाद लेने यहां जरूर पहुंचते हैं. कई पर्यटक इस मिठाई को अपने साथ यादगार के रूप में भी ले जाते हैं.सोशल मीडिया पर भी इस दुकान और इसकी अनूठी परंपरा की चर्चा होती रहती है. तेजी से बदलते दौर में जहां कई पुरानी परंपराएं खत्म होती जा रही हैं, वहीं उदयपुर की यह करीब 200 साल पुरानी दुकान आज भी अपनी विरासत, स्वाद और “हरि ॐ” से जुड़े अपनत्व को संजोए हुए है. यही वजह है कि यह दुकान सिर्फ मिठाई बेचने की जगह नहीं, बल्कि उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.