छोटीसादड़ी। जिले के छोटीसादड़ी कस्बे में एक विधवा महिला की बेरहमी से गला रेत कर हत्या का 15 दिन बाद खुलासा हुआ है। हत्या किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि 17 वर्षीय नाबालिग किशोर ने की है, यह सुनकर हर कोई दंग रह गया। पुलिस जांच में सामने आया कि किशोर मोबाइल पर पॉर्न और अपराध की कहानियां देखने का आदी था और पहले भी मोबाइल में देखी स्क्रिप्ट पर झूठा किडनैप का नाटक रच चुका था। अब उसने उसी आदत के चलते एक महिला की जान ले ली। हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की। मंगलवार को एसपी विनीत बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के मामले का खुलासा किया है। साइबर टीम की कड़ी जांच और 150 सीसीटीवी से खुली पोल : किशोर ने यही सोचा कि वह पुलिस को चकमा दे देगा। लेकिन एसपी विनीत कुमार बंसल, डीएसपी गोपाल हिण्डोनिया और छोटीसादड़ी थाना अधिकारी प्रवीण टांक की टीम ने 150 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगाले, साइबर एनालिसिस किया और घटनास्थल के पास के हर घर का डोर-टू-डोर सर्वे किया। शक तब गहराया जब पता चला कि एक किशोर अक्सर देर रात तक मोबाइल चलाते पाया जाता है और घटना की रात भी वह 1 बजे तक बाहर बैठा था। जब पूछताछ की गई तो पहले गोलमोल जवाब दिए, लेकिन बाद में तकनीकी साक्ष्यों और चोट के निशानों के दबाव में टूट गया। .दो साल पहले भी मोबाइल की लत ने रचवाया था अपहरण का नाटक : इस नाबालिग का इतिहास पहले से संदिग्ध था। दो साल पहले वह घर से अचानक गायब हो गया था। परिवार परेशान, पुलिस अलर्ट। फिर वह मंदसौर में मिला। जब लौटकर आया तो बोला दो अजनबी मुझे उठाकर ले गए थे, मैं किसी तरह भागकर आया। पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया था। लेकिन बाद में पुलिस जांच में यह कहानी फर्जी निकली। दरअसल, वह मोबाइल पर लगातार क्राइम थ्रिलर और अपहरण वाली स्क्रिप्ट देख रहा था। उसी से प्रभावित होकर वह खुद ही भागा और फिर घरवालों को ड्रामा सुना दिया। {19 मई की रात थी। किशोर ने अपने मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखा। मानसिक उत्तेजना इतनी बढ़ी कि उसने चाकू उठाया और पड़ोस में अकेली रह रही 54 वर्षीय गुडडीबाई माली के घर में दाखिल हो गया। महिला गहरी नींद में थी। आरोपी ने उसके कपड़े हटाने की कोशिश की, लेकिन वह जाग गई और बोली मैं तुझे पहचान गई हूं। बस, यह सुनते ही किशोर बौखला गया। उसने गला रेत दिया। महिला ने संघर्ष किया, लेकिन उसने बार-बार चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। खुद के हाथ पर लगे चाकू के घाव से फंसा आरोपी: हत्या के दौरान महिला ने बचने की पूरी कोशिश की। इसी छीना-झपटी में किशोर के खुद के हाथ पर उसी चाकू से गंभीर घाव हो गए। पुलिस को जब शक हुआ, तो मेडिकल चेकअप में उसके हाथ के जख्म और घटनास्थल से बरामद खून के सैंपल से मिलान कराया गया। यही नहीं, आरोपी ने हत्या के बाद गुडडीबाई के दो मोबाइल फोन चुराए, उनसे सिम निकालकर उन्हें खंडहर में फेंक दिया। खून से सना चाकू और कपड़े अपने घर में छुपा दिए और खुद नहा-धोकर ऐसे सो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो। वारदात के बाद आरोपी मृतक महिला के हत्यारों को पकड़ने और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन में भी शामिल रहा। यह था मामला: छोटीसादड़ी के माली मोहल्ला में 18 मई को रात में महिला की हत्या हुई थी। घर में अकेली रहने वाली 55 वर्षीय गुड्डी बाई पत्नी स्व. कन्हैयालाल माली का शव सोमवार सुबह उनके घर के भीतर खून से सना पड़ा मिला था। रात के समय किसी ने घर में प्रवेश कर धारदार हथियार से उनका गला रेत दिया था। शरीर पर कई घाव के निशान मिले थे। 19 मई को रोज की तरह गुड्डी बाई सुबह बाहर नल पर पानी भरने नहीं आईं, इससे पड़ोसियों को संदेह हुआ। कुछ लोग छत से झांककर भीतर पहुंचे और अंदर देखा तो शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। डॉ. धीरज सेन, बाल चिकित्सक इस केस में हमें किशोर मस्तिष्क के दो पहलू साफ नजर आते हैं भावनात्मक अपरिपक्वता और कल्पना को यथार्थ में बदलने की प्रवृत्ति। किशोर अवस्था में मस्तिष्क की इंहिबिशन कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसका मतलब है कि वे भावनाओं और उत्तेजनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाते। जब लगातार पॉर्न, क्राइम थ्रिलर, हिंसा आदि का डिजिटल एक्सपोजर होता है, तो उनका रियलिटी सेंस भी डिस्टर्ब हो जाता है। इस तरह की घटनाएं केवल कानून व्यवस्था की नहीं, बल्कि पारिवारिक, सामाजिक और डिजिटल जिम्मेदारी की विफलता भी हैं। बच्चों के मोबाइल यूज़ को सिर्फ पाबंदी नहीं, बल्कि मूल्य आधारित निगरानी की जरूरत है। 13–18 की उम्र में स्क्रीन टाइम, डिजिटल कंटेंट और भावनात्मक परिवेश तीनों पर सतत संवाद होना जरूरी है। अभिभावकों को सिर्फ मोबाइल छीनने से ज्यादा यह जानना जरूरी है कि बच्चा मोबाइल पर देख क्या रहा है और उसकी मनःस्थिति क्या है। यदि किशोर को शुरुआती मोबाइल लत के समय ही साइकोलॉजिकल काउंसलिंग मिल जाती, तो आज एक महिला की जान बच सकती थी और एक किशोर का जीवन बर्बाद होने से बचता।